विश्वविद्यालय परिसर


पुराण प्रसिद्ध उज्जयिनी नगरी के उपान्त्य क्षेत्र में लगभग 25 एकड़ भूमि में विस्तीर्ण एक कोमल उपत्यका के क्रोड़ में अवस्थित यह महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय सम्पूर्ण भारत के केन्द्र में संस्कृत अध्ययन, अध्यापन का प्रथम संस्थान है, जहाँ न केवल भारतवर्ष से अपितु सम्पूर्ण विश्व से ज्ञान पिपासु विद्यार्थी भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान से साक्षात्कार करेंगे और आधुनिक ज्ञान आधारित समाज में देश में एक उदात नागरिक की भूमिका अदा करेंगे।

पूरी परियोजना लगभग 68 करोड़ की हैं। वास्तुशिल्पज्ञ से चर्चा कर इस परियोजना पर वर्तमान में रूपये 42 करोड़ का व्यय अनुमानित किया गया है। इसके वास्तुशिल्प में न केवल वास्तुशास्त्र के सिद्धान्तों को ध्यान में रखा गया है अपितु तक्षशिला प्राचीन विश्वविद्यालय तथा मालवा के शिल्प के प्रभाव को भी आधुनिक वास्तुशिल्प में संयोजित किया गया है जिससे प्राचीन अर्वाचीन के समागम का एक मनोहारी दृश्य उपस्थित करने का प्रयास किया गया है। मुख्य शैक्षणिक भवन तथा मुख्य प्रशासनिक भवन के अलावा प्रथम शैक्षणिक भवन ‘पंचवटी’, ‘भरत का रंगमंच’, ‘वैदिक उद्यान’ तथा ‘वेधशाला’ इस परिसर के विशेष आकर्षण के केन्द्र रहेंगे। शैक्षणिक उपयोगिता की पूर्ति के साथ-साथ इस परिसर के आकल्पन में विद्यार्थियों के समग्र विकास के तत्वों को भी समाविष्ट किया गया है।

प्रथम शैक्षणिक भवन ‘पंचवटी’ के शिक्षा सत्र 2012-13 में निर्माण होने की सम्भावना है।